CG High Court:-“मिसकैरेज के बाद छुट्टी खत्म” कहने वालों को हाईकोर्ट का जवाब, महिला कर्मचारी को मिली बड़ी राहत

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CG High Court:-Chhattisgarh High Court ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है और बाद में वह दोबारा गर्भवती होती है, तो पहले लिया गया अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश में बाधा नहीं बनेगा। महिला को दूसरी प्रेग्नेंसी पर पूरा मैटरनिटी लीव मिलेगा।

मामला Food Corporation of India के रायपुर कार्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी से जुड़ा है। महिला वर्ष 2019 में जुड़वा बच्चों की मां बनने वाली थीं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण एक भ्रूण का मिसकैरेज हो गया। लंबे इलाज और डॉक्टरों की निगरानी के बाद उन्होंने सितंबर 2019 में एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया।

महिला कर्मचारी ने मातृत्व अवकाश और मेडिकल बिल भुगतान के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने उन्हें केवल 68 दिन का बिना वेतन अवकाश दिया। इतना ही नहीं, लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देकर उनके वेतन से 80 हजार 254 रुपए भी काट लिए गए।

CG High Court:-इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि महिला कर्मचारी को कानून के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी मिलनी चाहिए। कोर्ट ने वेतन से काटी गई रकम वापस करने का आदेश दिया है।

साथ ही कोर्ट ने करीब 3 लाख 76 हजार रुपए के मेडिकल बिलों की दोबारा जांच कर उचित भुगतान करने के निर्देश भी दिए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मातृत्व अवकाश किसी महिला पर एहसान नहीं, बल्कि उसका कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। यह महिला के सम्मान, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

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