CG News:-साइबर अपराधियों पर अब डिजिटल शिकंजा! CM साय बोले- 9 साइबर थानों के साथ नए कानून से अपराधियों की खैर नहीं

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CG News:-देशभर की तरह छत्तीसगढ़ में भी तेजी से बढ़ते साइबर अपराध अब कानून-व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल तकनीकों पर आधारित जांच और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश में 9 साइबर थाने शुरू किए जा चुके हैं, ताकि ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

राजधानी रायपुर में ‘नए आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला से पहले मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और ऐसे अपराधों में दोषियों तक पहुंचने तथा उन्हें सजा दिलाने में नए आपराधिक कानून बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं।

CG News:-मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक दौर में अपराध की जांच केवल प्रत्यक्ष गवाहों तक सीमित नहीं रह गई है। CCTV फुटेज, मोबाइल चैट, डिजिटल डेटा और फॉरेंसिक जांच अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के जरिए देशभर के पुलिस थाने एक डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं, जिससे अपराधियों का रिकॉर्ड और जांच संबंधी जानकारी साझा करना पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो गया है। देश के सभी पुलिस थानों में CCTNS प्रणाली लागू होने से डिजिटल जांच को और मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित यह कार्यशाला बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पुलिस, न्यायपालिका और अभियोजन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग से न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज बनेगी।

CG News:-कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा तथा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS), CCTNS, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल न्यायिक समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मंथन किया जा रहा है।

राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित जांच व्यवस्था से अपराधों की विवेचना अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, जिससे आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिलने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

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