Raipur Municipal Corporation:-रायपुर नगर निगम में ‘ईगो’ पर घमासान! सभापति बोले- शहर को नुकसान, महापौर ने कहा- लड़ाई नहीं, समन्वय की जरूरत

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Raipur Municipal Corporation:-रायपुर। राजधानी रायपुर के नगर निगम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान नगर निगम सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान और ‘ईगो’ को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आपसी अहंकार और संवाद की कमी का असर सीधे शहर के विकास पर पड़ता है।

सभापति ने अपने लंबे राजनीतिक और निगम अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने निगम में अलग-अलग भूमिकाओं में करीब 25 वर्षों तक काम किया है, लेकिन मौजूदा दौर जैसी स्थिति पहले कम ही देखने को मिली। उनका कहना था कि कई विवाद ऐसे हैं, जिन्हें आपसी बातचीत और समन्वय से सुलझाया जा सकता है, लेकिन संवाद की कमी के कारण मामले थाने और अदालत तक पहुंच रहे हैं।

Raipur Municipal Corporation:-‘नगर निगम लड़ाई के लिए नहीं, जनता के लिए है’

सभापति राठौड़ ने अपने संबोधन में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए समन्वय पर जोर दिया। उनका संदेश था कि निगम में टकराव से किसी एक पक्ष का नहीं, बल्कि पूरे शहर का नुकसान होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए तलाशना चाहिए। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधि और अधिकारी दोनों की भूमिका जनता के हित में काम करने की है, इसलिए व्यक्तिगत मतभेदों को संस्थागत कामकाज पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पिछले कुछ महीनों में रायपुर नगर निगम की बैठकों और कामकाज को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। जुलाई 2026 की सामान्य सभा से जुड़ी एक रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों के बैठक के दौरान मोबाइल पर व्यस्त रहने का मामला सामने आया था।

Raipur Municipal Corporation:-महापौर बोलीं- ‘लड़ाई नहीं, समन्वय की जरूरत’

महापौर मीनल चौबे ने निगम में किसी तरह की लड़ाई होने से इनकार करते हुए समन्वय को ही समाधान बताया। उनका कहना है कि निगम में सभी मिलकर काम कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों, दोनों को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए।

महापौर का यह रुख सभापति की चिंता से पूरी तरह अलग नहीं है। दोनों ही पक्षों की बातों में समन्वय और बेहतर संवाद की जरूरत दिखाई देती है, फर्क सिर्फ स्थिति को देखने के नजरिए का है।

Raipur Municipal Corporation:-नेता प्रतिपक्ष ने भी सभापति की बात का किया समर्थन

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सभापति के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनके लंबे अनुभव से निकली बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि विकास के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

आकाश तिवारी को अक्टूबर 2025 में रायपुर नगर निगम का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इस नियुक्ति को लेकर करीब 10 महीने से चल रहा विवाद तब खत्म हुआ था और सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया था।

Raipur Municipal Corporation:-पहले भी दिख चुकी है निगम में खींचतान

रायपुर नगर निगम में जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद और बैठकों में तीखी बहस के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। जुलाई 2026 में विशेष बैठक से पहले सभापति ने सत्ता पक्ष, विपक्ष और निर्दलीय पार्षदों के साथ अलग-अलग बैठकें कर समन्वय बनाने की कोशिश की थी।

वहीं, निगम की एक सामान्य सभा में गौरवपथ-2 समेत कई विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी। उस दौरान भी बैठक में तीखी नोकझोंक की स्थिति बनी थी, हालांकि कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने की बात सामने आई थी।

Raipur Municipal Corporation:-बड़ा सवाल- ‘ईगो’ से ऊपर उठकर क्या साथ चलेंगे अधिकारी और जनप्रतिनिधि?

रायपुर नगर निगम प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय निकायों में से एक है और राजधानी होने के कारण इसकी कार्यप्रणाली पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है। ऐसे में सभापति द्वारा सार्वजनिक मंच से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताना महज राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि निगम के कामकाज से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।

अब देखना होगा कि सभापति की ‘ईगो खत्म कर संवाद बढ़ाने’ की अपील, महापौर के ‘समन्वय’ वाले रुख और नेता प्रतिपक्ष के समर्थन के बाद निगम में वास्तव में बेहतर तालमेल बनता है या नहीं। क्योंकि आखिरकार इस टकराव का असर किसी नेता या अधिकारी पर नहीं, बल्कि रायपुर के आम नागरिकों और शहर के विकास कार्यों पर पड़ना है।

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