बच्चे को बचाने बाघ से भिड़ गई मादा भालू, राहगीरों ने बनाया वीडियो…

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नारायणपुर। एक मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है। वह किसी भी तरह का जोखिम उठाकर अपने बच्चे की रक्षा करने के लिए तत्पर रहती है। रविवार सुबह अबूझमाड़ के पांगुड़ गांव से एक वीडियो सामने आया जिसमें एक मादा भालू अपने बच्चे को बाघ से बचाने के लिए संघर्ष करती दिख रही है। मादा भालू ने अपने बच्चे को पीठ पर रख बाघ से संघर्ष किया और उसे सडक़ से दूर खदेड़ दिया। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो गांव के ही कुछ लोगों ने तब बनाया जब वे सडक़ के करीब से गुजर रहे थे।

वीडियो सामने आने के बाद इसकी जांच वन विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग कह रहा है कि वीडियो के आधार पर हम गांव वालों को वन्य जीवों की रक्षा के लिए जागरूक करेंगे। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर घने जंगलों से घिरे पांगुड़ गांव में कुछ दिन पहले एक नई सडक़ का निर्माण पूरा किया गया। यहां एक मादा भालू अपने शावक के साथ सडक़ पार कर रही थी, तभी एक बाघ वहां आ पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ ने जैसे ही मादा भालू और उसके बच्चे की ओर रुख किया, वैसे ही मादा भालू ने बिना डरे बाघ से टक्कर लेना शुरू कर दिया।

यह संघर्ष कुछ पलों तक चला, जिसमें मादा भालू ने अभूतपूर्व साहस दिखाते हुए बाघ को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान पूरे समय भालू के शावक अपनी मां से लिपटे नजर आता रहा। मादा भालू के साहस से टाइगर भाग खड़ा हुआ। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र से बाघ और भालू की लड़ाई का वीडियो सामने आया है।

वन मंत्री ने वीडियो शेयर कर लिखा- मां आखिर मां होती है

वन मंत्री और नारायणपुर के विधायक केदार कश्यप ने बाघ और भालू की लड़ाई का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा कि मां आखिर मां होती है। उन्होंने आगे लिखा कि अबूझमाड़ के पांगुड़ में बन रही नई सडक़ के बीच में मादा भालू अपने बच्चे को टाइगर से बचाने भिड़ गई। मां की ममत्व के आगे टाइगर को वहां से भागना पड़ा। इस दृश्य अबूझमाड़ के स्थानीय ग्रामीण ने अपने मोबाइल में कैद किया है।

जांच के लिए टीम का गठन

बाघ और भालू की फाइट का जो वीडियो सोशल मीडिया से हमें मिला है। हमने उसकी जांच के लिए एक टीम का गठन कर दिया है। इस मामले में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। यदि इस क्षेत्र में वन्य जीव, बाघ और भालू की जानकारी मिलती है तो क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। ऐसे कार्यक्रम चलाकर वन्य जीव संरक्षण का कार्य तेज किया जाएगा।

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