Wildlife Crime:-खाकी पर दाग या तस्करी का सिंडिकेट? बाघ की खाल के साथ पकड़े गए दो आरोपी, पुलिस कनेक्शन से मचा हड़कंप
Wildlife Crime:-महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सेफ पैसेज’ में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच आगे बढ़ी तो आरोपियों के ठिकानों से पैंगोलिन (सालखोर) के शल्क भी बरामद हुए, जिससे एक संगठित अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआती जांच में दोनों आरोपियों का पुलिस विभाग से जुड़ा होना सामने आया है। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है तथा एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई हैं।
Wildlife Crime:-संयुक्त ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता
यह कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने की। ऑपरेशन का उद्देश्य महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा पर सक्रिय वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को तोड़ना था।
कार्रवाई के दौरान दो बाघों की खाल बरामद की गई, जबकि आरोपियों के ठिकानों से पैंगोलिन के शल्क भी जब्त किए गए। पैंगोलिन दुनिया में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है और इसके शल्कों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में भारी मांग रहती है।
Wildlife Crime:-इंद्रावती–अबूझमाड़ में शिकार की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद बाघों का शिकार इंद्रावती–अबूझमाड़ के घने जंगलों में किया गया था। यह क्षेत्र मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों में गिना जाता है और यहां बाघों की मौजूदगी संरक्षण की दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि शिकार के बाद खाल और अन्य अंगों को किन राज्यों और किन खरीदारों तक पहुंचाया जाता था।
Wildlife Crime:-400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल दो तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य भारत के लगभग 400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। हाल के वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदगी और संरक्षण के सकारात्मक संकेत मिले हैं, इसलिए तस्करी के ऐसे मामलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
Wildlife Crime:-जीरो टॉलरेंस की चेतावनी
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। पूरे नेटवर्क की पहचान कर उससे जुड़े सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल, वित्तीय लेन-देन और अन्य राज्यों से संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।
Wildlife Crime:-क्या कहता है कानून?
भारत में बाघ और पैंगोलिन दोनों वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी (Schedule-I) में संरक्षित हैं। इनके शिकार, व्यापार या तस्करी के मामलों में कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
