CG News:-पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन: पंडवानी की अमर आवाज़ हुई खामोश, छत्तीसगढ़ ने खोया अपनी संस्कृति का सबसे बड़ा स्वर
CG News:-छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व मंच पर पहचान दिलाने वाली महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में शनिवार देर रात उन्होंने रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थीं और उपचाराधीन थीं। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है।
CG News:-मुख्य बातें
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| नाम | पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई |
| कला | पंडवानी लोकगायन |
| आयु | 70 वर्ष |
| निधन | रायपुर एम्स |
| जन्म | 8 अगस्त 1956, अटारी गांव, पाटन (दुर्ग) |
| प्रमुख सम्मान | पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार |
CG News:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को पूरी दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का जाना भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
CG News:-सीएम विष्णुदेव साय पहुंचे एम्स, कहा- सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति
निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर एम्स पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। अपनी अनूठी गायन शैली और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से उन्होंने प्रदेश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।
CG News:-संघर्ष से शिखर तक का सफर
तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के अटारी गांव में हुआ था। लोकपर्व ‘तीज’ के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम तीजन रखा गया।
बचपन बेहद गरीबी में बीता, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने चचेरे नाना बृजलाल पारधी से पंडवानी सीखना शुरू किया।
उस दौर में महिलाओं द्वारा सार्वजनिक मंच पर पंडवानी गाना सामाजिक परंपराओं के खिलाफ माना जाता था। विरोध इतना बढ़ा कि उन्हें परिवार और समाज से भी बहिष्कार झेलना पड़ा। उनकी वैवाहिक जिंदगी भी प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया।
CG News:-13 साल की उम्र में पहला मंच, फिर दुनिया तक पहुंची पंडवानी
महज 13 वर्ष की आयु में चंदखुरी के सतीचौरा चौक में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उनकी गायकी की गूंज जल्द ही गांवों से निकलकर भिलाई, दुर्ग, रायपुर, भोपाल और फिर पूरे देश तक पहुंच गई।
बाद में उनकी प्रस्तुति ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दर्शकों का दिल जीत लिया। विशेष रूप से ‘दुशासन वध’ की उनकी प्रस्तुति विश्वभर में चर्चित रही।
CG News:-दुनिया के कई देशों में बिखेरा भारतीय लोककला का जादू
सांस्कृतिक राजदूत के रूप में तीजन बाई ने इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, तुर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस सहित अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर भारतीय लोककला का परचम लहराया।
उन्होंने यह साबित किया कि लोककला की कोई सीमा नहीं होती और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू पूरी दुनिया तक पहुंच सकती है।
CG News:-तीजन बाई को मिले प्रमुख सम्मान
| वर्ष | सम्मान |
| 1988 | पद्मश्री |
| 1995 | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार |
| 2003 | पद्मभूषण |
| 2007 | नृत्य शिरोमणि |
| 2017 | डी.लिट. (खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय) |
| 2019 | पद्म विभूषण |
| अन्य | जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार एवं कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान |
CG News:-महिला सशक्तिकरण और लोककला संरक्षण की मिसाल
तीजन बाई केवल कलाकार ही नहीं थीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, साक्षरता अभियान और लोकसंस्कृति संरक्षण की मजबूत आवाज भी थीं। उन्होंने अपने संघर्ष से यह साबित किया कि प्रतिभा किसी सामाजिक बंधन की मोहताज नहीं होती।
CG News:-छत्तीसगढ़ की आवाज अब हमेशा गूंजेगी
तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पंडवानी, उनकी आवाज और उनकी संघर्षगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाकर इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया।
