बिना तलाक लिए कर ली दूसरी शादी, दो शासकीय सेवकों पर गिरी गाज…

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रायपुर। राज्य महिला आयोग ने महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों पर सुनवाई करते हुए कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में महिला अधिकारों की रक्षा को लेकर सत कदम उठाने के संकेत दिए गए। आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा, सरला कोसरिया, ओजस्वी मण्डावी और दीपिका शोरी भी उपस्थित थी।

एक महिला ने आयोग से सहायता मांगी, क्योंकि उसे अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से मना किया जा रहा था। महिला ने आरोप लगाया कि उसके भतीजे ने संपत्ति बेचकर पूरी रकम अपने पास रख ली है। आयोग ने जब आरोपी से पूछताछ की, तो उसने गुमराह करने की कोशिश की। आयोग ने उन्हें अगली सुनवाई में थाना के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया।

सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा:

अन्य मामले में दो शासकीय सेवकों ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली थी, जो कि सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन था। आयोग ने पुष्टि की कि इन दोनों के खिलाफ साक्ष्य मौजूद हैं, और इसे लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग और मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को पत्र भेजकर दोनों को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा की जाएगी।

झूठ बोलने वाली महिला को चेतावनी: आयोग ने एक और मामले में विवाह के संबंध में झूठ बोलने वाली महिला को चेतावनी दी। महिला ने अपने पूर्व पति से तलाक लेकर दूसरी जगह शादी की योजना बनाई थी और जब इसका पता चला, तो उसने अनावेदकों को झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी। इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया।

सख्त निर्देश पर भरण-पोषण की एकमुश्त राशि देने को तैयार

एक और मामले में एक महिला ने अपने पति पर दूसरी महिला के साथ भागने का आरोप लगाया और कहा कि उसे तलाक के लिए दबाव डाला जा रहा है। महिला ने बताया कि पिछले तीन साल से उसे किसी भी प्रकार का भरण-पोषण नहीं मिल रहा है, जबकि पति ने पहले 3 लाख रुपए एकमुश्त भरण-पोषण देने का वादा किया था। आयोग की समझाईश पर पति ने यह राशि देने पर सहमति जताई। इस मामले का अंतिम निर्णय शनिवार को होगा।

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