बैंक के निजी खाते से करोड़ों के लेन-देन का मामला, आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर

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भिलाई। बैंक में एक फर्जी खाता खुलवाकर उस खाते से करोड़ों रुपए के लेनदेन के मामले में सख्ती के बाद आरोपी अनिमेष सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। न्यायिक प्रक्रिया के बाद उसे जेल भेजा गया।

एएसपी व पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तवर ने बताया कि खुर्सीपार टीआई अंबर भरद्वाज ने मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि दो प्रकरणों में उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी करने का आदेश जारी किया था।

सीबीआई जांच कराने की मांग

अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कहा है कि सीबीआई से जांच के विकल्प खुले हुए हैं। याचिकाकर्ता द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ऐसे में यदि शासन द्वारा उचित प्रकार से जांच कर कार्यवाही नहीं की गई तो न्यायालय के सामने सीबीआई से जांच और कार्यवाही का विकल्प खुला रहेगा। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा ने कहा कि निश्चित रूप से अनिमेष सिंह के नाम से खोले गए खाते में हवाला के माध्यम से पैसे का लेनदेन हुआ है जो कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने बाद खुलकर सामने आएगी।

कोर्ट ने लगाई थी फटकार

न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार को 2 महीने का समय दिया कि वह अपनी जांच फिर से पूरी करे और न्यायालय को 21 अप्रैल तक संपूर्ण जानकारी प्रदान करें। इससे पूर्व जनवरी में उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने डीजीपी से व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर संपूर्ण जानकारी प्रदान करने को कहा था। साथ ही यस बैंक को इस मामले में पक्षकार बनाकर यस बैंक में खोले गए अनिमेष सिंह के नाम के खाते से होने वाले समस्त लेनदेन की संपूर्ण जानकारी न्यायालय को बताए जाने की अपेक्षा की गई थी।

हाल ही में बैंक की अधिवक्ता ने खाते से किए गए लेन-देन के मामले में कुछ जानकारियां न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। जिस पर छत्तीसगढ़ सरकार के महाधिवक्ता ने मामले की पुन: जांच किए जानेन्यायालय से निवेदन किया।

जानिए क्या है मामला

इस मामले में खुर्सीपार थाने में दो अलग अलग प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोपी अनिमेष सिंह ने सिविल ठेकेदार हितेश चौबे के खिलाफ अपराध दर्ज कराया। हितेश चौबे नेे काउंटर एफ आईआर दर्ज करवाया। प्रथम सूचना रिपोर्ट के तुरंत बाद लीपापोती की कार्यवाही करते हुए अनिमेष सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट को शासन द्वारा खत्म किए जाने न्यायालय को लिखा गया। जबकि हितेश चौबे के द्वारा दर्ज कराई गई एफ आईआर पर अब तक जांच चल रही है। अनिमेष सिंह द्वारा प्रकरण में विधिवत जमानत ले लिए जाने के बावजूद डीजीपी द्वारा प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया। बल्कि अनिमेष सिंह को भगोड़ा घोषित करते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था।

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