CG News:-विकास की तस्वीर पर बारिश ने खींची लकीर: कहीं झोपड़ी में आंगनबाड़ी, तो कहीं कमरभर पानी पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
CG News:-गरियाबंद। आदिवासी बहुल गरियाबंद जिले में विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। मैनपुर क्षेत्र में जहां बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र अब भी झोपड़ी में संचालित होने की बात सामने आई है, वहीं साल्हेभांटा क्षेत्र में पुल के अभाव में बारिश के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को नाले का पानी पार करना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं कई काम स्वीकृति और योजनाओं के बावजूद अधूरे नजर आ रहे हैं।

CG News:-खेत के बीच झोपड़ी में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
मैनपुर विकासखंड के सरगीगुड़ा ग्राम पंचायत के टेकनपारा में आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन की तस्वीर सामने आई है। बताया जा रहा है कि खेतों के बीच सड़क किनारे बनी एक झोपड़ी में बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है।
बरसात के मौसम में ऐसी जगह पर बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खुले और अस्थायी ढांचे में बारिश के दौरान पानी भरने के साथ जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में कुपोषण से लड़ने और बच्चों को पोषण एवं प्रारंभिक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए केंद्र की यह स्थिति व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।

CG News:-जिले में 81 केंद्र जुगाड़ के भरोसे
उपलब्ध जानकारी के अनुसार गरियाबंद जिले में कुल 1,525 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 209 केंद्र किराए के भवनों में और 91 अन्य शासकीय भवनों में चल रहे हैं। वहीं 81 केंद्र सामुदायिक सहयोग के नाम पर जुगाड़ से संचालित किए जा रहे हैं।
बताया गया है कि लंबे समय से भवन की मांग के बाद करीब दो साल पहले 12 आंगनबाड़ी भवनों को मंजूरी मिली थी, लेकिन इनके निर्माण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी। इससे सवाल उठता है कि जब बच्चों के लिए स्थायी भवन की जरूरत लंबे समय से सामने है, तो निर्माण में देरी क्यों हो रही है।

CG News:-सड़क बनी, लेकिन पुल नहीं… बारिश में रास्ता बन जाता है नाला
दूसरी तस्वीर साल्हेभांटा क्षेत्र के बनवापारा से खासरपारा के बीच की है। यहां प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान यानी PM JANMAN के तहत सड़क निर्माण किया गया है। पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों में भी बनवापारा से खासरपारा मार्ग को PM JANMAN के तहत स्वीकृत कार्यों में शामिल बताया गया है।
लेकिन रास्ते में पड़ने वाले नाले पर पुल नहीं होने से बारिश के दिनों में यही सड़क लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। नाले में पानी बढ़ने पर ग्रामीणों को आवाजाही में मुश्किल होती है और स्कूली बच्चों को भी जोखिम उठाकर रास्ता पार करना पड़ता है।

स्थानीय पालक रूपसिंह मरकाम और पूर्व जनपद सदस्य कल्याण ओटी के मुताबिक, बारिश के पूरे सीजन में ग्रामीणों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। बच्चों को कई बार पानी के बीच से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
CG News:-30 मीटर पुल के लिए 1.58 करोड़ की मंजूरी का दावा
मामले में PMGSY के कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर के अनुसार खासरपारा नाले पर करीब 30 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए 158 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। उन्होंने बताया कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
यानी समाधान की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन फिलहाल बारिश के बीच ग्रामीणों की परेशानी बरकरार है।
CG News:-सवाल सिर्फ एक पुल या एक भवन का नहीं
गरियाबंद के आदिवासी अंचलों की ये तस्वीरें सिर्फ दो स्थानों की समस्या नहीं, बल्कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी निगरानी पर भी सवाल खड़े करती हैं। सड़क बनने के बाद पुल का इंतजार और आंगनबाड़ी के लिए स्थायी भवन की जरूरत यह बताती है कि किसी योजना की मंजूरी के साथ उसका समय पर और सुरक्षित तरीके से पूरा होना भी उतना ही जरूरी है।
अब देखना होगा कि स्वीकृत पुल का निर्माण कब शुरू होता है और अस्थायी व्यवस्था में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थायी भवन कब मिलते हैं। तब जाकर सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर बच्चों और ग्रामीणों तक पूरी तरह पहुंच सकेगा।
