CG News:-रविशंकर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भर्ती पर घमासान: API स्कोर छुपाने से लेकर UGC नियम तोड़ने तक के आरोप

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CG News:-Pandit Ravishankar Shukla University में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी और UGC नियमों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने अब मामला राज्यपाल के बाद उच्च शिक्षा मंत्री Tank Ram Verma तक पहुंचा दिया है।

अभ्यर्थियों ने मंत्री को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के नियमों को नजरअंदाज किया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की भर्ती नियमावली में मूल निवासियों को वरीयता देने का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन इस बार चयन प्रक्रिया में इसे लागू नहीं किया जा रहा।

उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में सबसे अहम माने जाने वाले Academic Performance Index (API) स्कोर को सार्वजनिक नहीं किया गया। साथ ही चयन के बाद उम्मीदवारों के प्राप्त अंकों की सूची भी जारी नहीं की जा रही, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि देश के कई विश्वविद्यालय API स्कोर और मेरिट लिस्ट सार्वजनिक करते हैं, लेकिन यहां जानकारी छिपाई जा रही है।

CG News:-विवाद उस समय और बढ़ गया जब अभ्यर्थियों ने 3 फरवरी 2025 को हुए एसोसिएट प्रोफेसर बायोटेक्नोलॉजी (अनुसूचित जनजाति बैकलॉग) पद के इंटरव्यू में UGC नियम 10(F)(iii) के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनका दावा है कि नियमित वेतनमान के अनुभव को मान्यता देने के बजाय संविदा, तदर्थ और अस्थायी अनुभव को भी जोड़ा गया, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, भाषाई और जनजातीय परिस्थितियों को स्थानीय अभ्यर्थी बेहतर समझते हैं, इसलिए राज्य के युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अभ्यर्थियों ने सभी आवेदकों के डोमिसाइल प्रमाण-पत्रों की जांच, API स्कोर सार्वजनिक करने, दावा-आपत्ति का मौका देने और अंतिम चयन सूची में प्राप्तांक जारी करने की मांग उठाई है।

उम्मीदवारों ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय की 94वीं कार्यपरिषद बैठक में चयन मानदंड तय किए गए थे, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में उनका पालन नहीं किया जा रहा। अब मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

इस पूरे विवाद के बीच विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. Sachchidanand Shukla का बयान भी चर्चा में है। कुलपति ने साफ कहा कि भर्ती प्रक्रिया UGC नियमों के अनुसार बनाई गई समिति के माध्यम से कराई जा रही है और शिकायतों के आधार पर “जांच का सवाल ही नहीं” उठता। उन्होंने कहा कि समिति में वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं और गड़बड़ी की संभावना नहीं है।

हालांकि अभ्यर्थियों का आरोप है कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो फिर API स्कोर, मेरिट और मूल्यांकन मानदंड सार्वजनिक करने में दिक्कत क्यों हो रही है। अब देखना होगा कि उच्च शिक्षा विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।

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