Chhattisgarh Assembly:-26 साल में इतिहास भी नहीं संभाल पाया छत्तीसगढ़! सदन में गूंजा सवाल- दीमक खा गईं फाइलें, अमेरिका में मिली 19 करोड़ की मूर्ति

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Chhattisgarh Assembly:-रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से सदन में उठा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और विधायक धर्मजीत सिंह ने सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ का समर्पित अभिलेखागार (Archives) नहीं बन सका और न ही ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रयास किए गए।

अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ का समृद्ध इतिहास आज भी बिखरा हुआ है। सिरपुर, भोरमदेव, राजिम, बारसूर, ताला, मल्हार सहित कई ऐतिहासिक स्थलों से मिली प्राचीन मूर्तियों और अवशेषों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरातत्व विभाग के पास न तो समुचित दस्तावेज हैं और न ही संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था दिखाई देती है।

Chhattisgarh Assembly:-19 करोड़ की मूर्ति का मामला भी उठा

सदन में सिरपुर से प्राप्त सातवीं शताब्दी की भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा का मामला भी उठा। यह प्रतिमा महंत घासीदास संग्रहालय से 1980 के दशक में चोरी हो गई थी। हाल ही में यह प्रतिमा अमेरिका में प्राचीन कलाकृतियों की तस्करी से जुड़े एक नेटवर्क के पास बरामद हुई है और भारत को लौटाने की प्रक्रिया चल रही है।

अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि संग्रहालय के मूल रजिस्टर दीमक लगने से नष्ट हो गए, जिससे प्रतिमा से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित नहीं रह सके। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि दस्तावेज सुरक्षित रहते तो ऐतिहासिक धरोहरों के दावे और मजबूत होते।

Chhattisgarh Assembly:-‘शोध और संरक्षण दोनों में कमी’

भाजपा विधायक ने कहा कि प्रदेश में कई पुरातात्विक स्थल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं और वर्तमान में सीमित स्थानों पर ही खुदाई का कार्य हो रहा है। उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन की भूमि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जहां खुला मानव संग्रहालय विकसित होना था, वहां अन्य गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके अनुसार राज्य में संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व पर व्यापक शोध कार्य भी नहीं हो रहा है।

Chhattisgarh Assembly:-धर्मजीत सिंह और डॉ. चरणदास महंत ने भी उठाए सवाल

विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि ताला, मल्हार, बिलासपुर और भोरमदेव जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर आधुनिक संग्रहालयों का अभाव है, जिससे वहां की विरासत को उचित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरगुजा के रामगढ़ स्थित प्राचीन नाट्यशाला के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश की कई महत्वपूर्ण धरोहरें उपेक्षा का शिकार हैं।

Chhattisgarh Assembly:-सरकार का जवाब

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में कहा कि राज्य की संरक्षित धरोहरों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए संग्रहालयों के निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर परिसर के संरक्षण एवं विकास के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 150 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। उन्होंने यह भी बताया कि महंत घासीदास संग्रहालय में अभिलेख नष्ट होने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य अभिलेखागार विकसित करने की दिशा में काम जारी है। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ से जुड़े लाखों ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और उन्हें राज्य में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे।

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