Chhattisgarh News:-“कलेक्टर साहब, पानी ज़हर बन चुका है!” एक ही वार्ड में 8 मौतें, TDS पर गांव वालों का दावा और सरकारी रिपोर्ट आमने-सामने

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Chhattisgarh News:-गरियाबंद/देवभोग। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का देवभोग ब्लॉक एक बार फिर पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। सुपेबेड़ा गांव के बाद अब देवभोग नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक-3 के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इलाके के कई बोरवेलों में पानी का TDS (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) सामान्य सीमा से कहीं अधिक है और इसी वजह से वर्षों से किडनी संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले छह वर्षों में इस वार्ड में किडनी की बीमारी से 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पूरे देवभोग मुख्यालय में यह आंकड़ा 15 से अधिक बताया जा रहा है।

Chhattisgarh News:-वार्ड-3 में क्या है लोगों का दावा?

करीब 350 आबादी वाले वार्ड-3 में तीन सार्वजनिक नल और लगभग 80 निजी बोरवेल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इनमें से 50 से अधिक बोरवेलों के पानी का TDS 800 से 1200 mg/L तक पहुंचता है। लोगों का आरोप है कि इसी कारण इलाके में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ी है।

ग्रामीणों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच रविशंकर निषाद, चरण निषाद, अभिमन्यु सेन, खीरोबाई ठाकुर, खगेश्वर ठाकुर, रामेश्वर यादव और प्रेम सिंह ठाकुर सहित कई लोगों की मौत किडनी संबंधी बीमारी से हुई। वहीं वार्ड का एक सरकारी कर्मचारी किडनी ट्रांसप्लांट के बाद डायलिसिस पर जीवन बिता रहा है।

Chhattisgarh News:-600 मीटर दूर से लाना पड़ रहा पीने का पानी

स्थानीय निवासी भजन ठाकुर का कहना है कि माता-पिता को किडनी की बीमारी में खोने के बाद उनका परिवार अब घर के बोरवेल का पानी पीने से बचता है। वे रोज़ाना लगभग 600 मीटर दूर स्थित एक दूसरे स्रोत से पीने का पानी लाते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड में पेयजल के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाला सोलर पंप कई महीनों से बंद पड़ा है। समाधान शिविर में शिकायत देने के बावजूद अब तक इसे चालू नहीं किया गया है। घर-घर जल आपूर्ति की व्यवस्था भी प्रभावित बताई जा रही है।

Chhattisgarh News:-सरकारी रिपोर्ट में अलग तस्वीर

मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के उपयंत्री बी.एस. सिदार ने बताया कि विभाग द्वारा वार्ड-3 के जल स्रोतों की जांच की गई थी, जिसमें अधिकतम TDS करीब 300 mg/L पाया गया। विभाग का कहना है कि 300–500 mg/L तक का TDS सामान्य पेयजल सीमा में माना जाता है।

वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू के अनुसार लंबे समय तक अत्यधिक TDS वाला पानी पीने से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन वार्ड-3 में आबादी के अनुपात में जलजनित रोगों का कोई असामान्य रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। अस्पताल में किडनी रोगियों की संख्या या मौतों को दूषित पानी से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं बताया गया है।

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