NEET 2026:-NEET रिजल्ट के बाद हरिका की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल, अब परिवार से मिला CJP; मुआवजे और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग

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NEET 2026:-जगदलपुर में NEET-UG परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद 20 वर्षीय छात्रा हरिका राव नायडू की मौत का मामला अब परीक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। बोधघाट थाना क्षेत्र के आड़ावाल खासपारा की रहने वाली हरिका पिछले करीब तीन वर्षों से NEET की तैयारी कर रही थीं और यह उनका तीसरा प्रयास था। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस बार भी चयन नहीं होने के बाद उनकी मौत हो गई। मामले में पुलिस ने जांच शुरू की थी।

घटना के बाद हरिका के परिवार में गहरा दुख है। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया सामने आई है। 23 जुलाई को कोंडागांव में हरिका को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च आयोजित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

इसी कड़ी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छत्तीसगढ़ प्रमुख महेंद्र भारद्वाज के हरिका के परिवार से मिलने का दावा सामने आया है। CJP की ओर से केंद्र और राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थियों के मानसिक दबाव को लेकर व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई।

CJP का कहना है कि हरिका का मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की चिंता से जुड़ा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भारी शैक्षणिक और सामाजिक दबाव का सामना करते हैं।

NEET 2026:-युवाओं की राय जानने की तैयारी

CJP की ओर से अगस्त-सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक अभियान’ शुरू करने की बात भी कही गई है। पार्टी के मुताबिक इस अभियान के जरिए शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक मुद्दों पर युवाओं तथा आम लोगों की राय सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

CJP ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत भी बताई है। संगठन के मुताबिक सुधार केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, किताबें, संसाधन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हरिका के परिवार के लिए यह घटना किसी राजनीतिक या सामाजिक अभियान से कहीं बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी है। परिवार की ओर से भी सरकार से यह सवाल उठाया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था किस तरह के कदम उठाएगी।

गौरतलब है कि हरिका की घटना के बाद छत्तीसगढ़ में छात्र संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से भी NEET व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर आवाज उठाई गई है। रायपुर में हुए एक छात्र प्रदर्शन में भी हरिका के परिवार के लिए न्याय और आर्थिक सहायता की मांग उठाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

मुद्दा अब सिर्फ मुआवजे का नहीं है। सवाल यह भी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव के बीच ऐसी व्यवस्था कैसे बनाई जाए, जहां परीक्षा में असफलता को जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक पड़ाव समझा जाए।

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