महंगा पड़ा 20% कमीशन की मांग, शिक्षा विभाग ने लिपिक को किया सस्पैंड

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भिलाई। अपने ही कॉलेज के प्रोफेसर से उनकी मां के इलाज के बाद मेडिकल बिल को क्लीयर करने 20 फीसदी कमीशन मांगना सहायक ग्रेड-1 लिपिक को महंगा पड़ गया। मामला भिलाई-3 स्थित शासकीय खूबचंद बघेल महाविद्यालय का है, जिसकी सहायक ग्रेड-1 लिपिक भुवनेश्वरी कश्यप को उच्च शिक्षा विभाग ने सस्पैंड कर दिया है। चिकित्सा देयक के लिए कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत प्रधान ने लिपिक को बिल पुटअप किए थे। कुछ दिन तक वह गलतियां निकालती रही।

पूर्व में भी मिली कई शिकायतें

अपर संचालक दुर्ग राजेश पांडेय ने बताया कि लिपिक द्वारा सहायक प्राध्यापकों के साथ दुर्व्यवहार और उनकी डिपॉजिट की राशि के भुगतान के लिए 1 फीसदी कमीशन की मांग की जाती रही है। इसके अलावा लिपिक की पूर्व पदस्थापना चंदूलाल चंद्राकर शासकीय महाविद्यालय धमधा में भी प्राचार्य के साथ सहयोग न करते हुए मनमानी में दोषी पाया गया है। लिपिक के कृत्यों के लिए सिविल सेवा नियम के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में लिपिक को रायपुर क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय में अटैच किया गया है।

तीस हजार मांगे

इसके बाद बिल को क्लीयरेंस में भेजने के लिए लंबा इंतजार करवा दिया। कुछ समय बाद बिल क्लीयर करने के लिए प्रोफेसर से 20 फीसदी कमीशन की डिमांड की। बताया जा रहा है कि बिल अमाउंट करीब 1.50 लाख रुपए था, जिसमें लिपिक ने चिकित्सा देयक की राशि का 20 फीसदी यानी 30 हजार रुपए मांगे। लिपिक द्वारा जानबूझकर बिल अटकाए जाने और कमीशनबाजी की शिकायत प्रोफेसर ने अपर संचालक क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग राजेश पांडेय से की।

मामले की जांच के बाद लिपिक भुवनेश्री कश्यप को दोषी पाया गया। अपर संचालक की अनुशंसा और दस्तावेजों को देखने के बाद उच्च शिक्षा संचालनालय ने लिपिक के निलंबन की कार्रवाई कर दी है।

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