मोबाइल की लत से बच्चों को भी हार्ट अटैक, गुजरात में 8 साल के बच्चे की मौत…
रायपुर। कर्नाटक व गुजरात में हाल में दो स्कूली बच्चों की हार्ट अटैक से मौत हो गई। ये घटना बहुत ही चौंकाने वाली है और डॉक्टरों को हतप्रभ कर दिया है। कम उम्र में हार्ट अटैक हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चे भी इस मामले में कितने सुरक्षित हैं।
प्रदेश में हालांकि इस तरह का कोई केस नहीं आया है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार मोबाइल की लत व फिजिकल एक्टीविटीज कम होने से बच्चों में भी हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ता जा रहा है। इससे बच्चों को बचाना है तो मोबाइल की लत छुड़वानी ही होगी। फिजिकल एक्टीविटीज पर भी बढ़ाना देना होगा। गुजरात में 6 जनवरी को कक्षा तीन में पढ़ने वाले 8 साल के एक बच्चे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके पहले भी ऐसे कुछ केस देश में आए हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल एक बड़ी वजह है। आजकल के बच्चे फिजिकली एक्टिव नहीं है। मोबाइल व टीवी के कारण खेलकूद व शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं। ऑनलाइन गेम व क्लासेज के चलते यह गतिविधि और भी कम हो रही है। इसके कारण मोटापा कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसी समस्या हो रही है जो हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाती है।
आजकल के बच्चे जंक व प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक करते हैं, जो हैल्थ पर बुरा असर डालता है। इनमें ट्रांस फैट बहुत ज्यादा शुगर, नमक होता है, जो दिल की धमनियों को कमजोर करते हैं और यह हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ाता है। बेढंगा लाइफस्टाइल के कारण हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है जो कि मेंटल हैल्थ को खराब कर रहा है। इसके अलावा बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मोबाइल में तरह-तरह की वीडियो देखकर खुद को आगे बढ़ाने का दबाव भी हार्ट पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
