Goncha Mahaparv:-600 साल पुरानी परंपरा का आगाज़! बस्तर के ऐतिहासिक गोंचा महापर्व की तैयारियां तेज, सरकार से 18 लाख की मांग
Goncha Mahaparv:-बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक और करीब 600 वर्षों से मनाया जा रहा ऐतिहासिक गोंचा महापर्व एक बार फिर पूरे उत्साह के साथ आयोजित होने जा रहा है। जगदलपुर में इस भव्य पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस दौरान लगातार 9 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान, महाभंडारा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक आयोजन होंगे। गोंचा महापर्व को बस्तर की पहचान माना जाता है और यह हर साल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मंदिर समिति के अनुसार, गोंचा पर्व का आयोजन हर वर्ष समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है। आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पहले संस्कृति विभाग की ओर से 5 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इस वर्ष बढ़ती आवश्यकताओं और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए तहसीलदार के माध्यम से राज्य शासन को 18 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।

समिति के सदस्य नरेंद्र पाणिग्राही ने बताया कि प्रस्ताव की जानकारी मिलने के बाद जल्द ही तहसीलदार और कलेक्टर के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में गोंचा महापर्व की व्यवस्थाओं, सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा शासन से मिलने वाले सहयोग पर विस्तृत चर्चा होगी, ताकि आयोजन को और अधिक भव्य एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।
Goncha Mahaparv:-क्या है गोंचा महापर्व?
गोंचा महापर्व को बस्तर की रथयात्रा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता बस्तर की जनजातीय परंपराओं का अनूठा समावेश है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की शोभायात्रा निकाली जाती है। वहीं, बांस से बनी पारंपरिक ‘तुपकी’ और गोंचा फल के साथ खेला जाने वाला प्रतीकात्मक आयोजन इस पर्व को देश के अन्य रथ उत्सवों से अलग पहचान देता है।
