High Court:-10 साल की सजा काट रहा कैदी बनेगा बहन की विदाई का हिस्सा, हाईकोर्ट ने कहा- ‘जेल से नहीं, पुलिस पहरे में निभाएगा भाई का फर्ज
High Court:-मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सजायाफ्ता कैदी को अपनी बहन की शादी की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि, अदालत ने उसे अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में समारोह में शामिल होने की इजाजत दी।
हाईकोर्ट की जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकल पीठ ने कहा कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी महत्व है। इसलिए सुरक्षा से समझौता किए बिना आरोपी को अपनी बहन की विदाई की रस्म निभाने का अवसर दिया जाना चाहिए।
High Court:-क्या है पूरा मामला?
भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर को डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया था। दुर्ग की विशेष अदालत ने नवंबर 2025 में उसे आईपीसी की धारा 397 के तहत 10 वर्ष और धारा 120-बी के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। फिलहाल वह जेल में बंद है।
मनीष ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा कि उसकी सगी बहन की शादी है और परिवार में उसके अलावा कोई भाई नहीं है, जो विदाई की पारंपरिक रस्में निभा सके।
High Court:-राज्य सरकार ने किया था विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अंतरिम जमानत का विरोध किया गया। सरकार ने कहा कि आरोपी गंभीर अपराध में दोषी है, इसलिए उसे खुला छोड़ना उचित नहीं होगा। हालांकि, सरकार ने यह सुझाव भी दिया कि यदि अदालत उचित समझे तो उसे पुलिस सुरक्षा में समारोह में भेजा जा सकता है।
High Court:-हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए 30 जून को पुलिस सुरक्षा में मनीष बंसोर को भिलाई स्थित विवाह स्थल ले जाने का निर्देश दिया। अदालत ने केंद्रीय जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
रस्में पूरी होने के तुरंत बाद पुलिस आरोपी को वापस जेल लेकर जाएगी।
