स्काई वॉक को लेकर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने कहा- भ्रष्टाचार का माध्यम…

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रायपुर। स्काईवॉक को लेकर राजधानी में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। अब अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू हो रहा है। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस इसे जनता के पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार का माध्यम करार दे रही है। वहीं, भाजपा का कहना है कि अधूरे विकास कार्य को पूरा किया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकाल में राजनीति के उद्देश्य से स्काईवॉक के काम को रोका गया था।

इस मुद्दे पर डिप्टी सीएम अरुण साव का कहना है कि राजधानी में ट्रैफिक समस्या को देखते हुए स्काईवॉक की योजना बनी थी। बहुत बड़े पैमाने पर काम हो चुका था, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने राजनीति करने के उद्देश्य से स्काईवॉक के काम को रोककर जनता को इसके लाभ से वंचित कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जांच कमेटी बनाई थी और उनकी ही कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि स्काईवॉक को बनाया जाना चाहिए।

स्काईवॉक नहीं बनने के लिए कांग्रेस पूरी तरह दोषी है। वहीं, हमारी सरकार बनने के बाद स्काईवॉक के कार्य को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। इसके लिए टेंडर लगातार जारी किए गए। अब 37.75 करोड़ रुपए के टेंडर की मंजूरी हो गई है, अब काम तेजी से आगे बढ़ेगा। कार्य की लगातार समीक्षा करेंगे, ताकि काम आगे बढ़ सकें।

इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा, राज्य सरकार अधूरे स्काईवॉक पर पैसा खर्च करने के बजाय आम जनता की मांग के अनुरूप फ्लाईओवर बनाने की दिशा में आगे बढ़े। इसे वर्तमान एवं भविष्य में भी यातायात समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, सरकार और भाजपा के नेता जिद छोड़कर शहर को बेहतर बनाने के लिए काम करें।

शहर की आवश्यकताओं को पूरा करें और भविष्य में शहर में किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो इस दिशा में एक मजबूत योजना के साथ काम करें। उन्होंने कहा, स्काईवॉक बनाने के लिए पहले लगभग 37 करोड का टेंडर हुआ था। काम शुरू होने के डेढ़ महीने बाद ही टेंडर की राशि में बढ़ोतरी किया गया जो लगभग 67 करोड रुपए तक पहुंच गया था। लेकिन स्काईवॉक अधूरा ही रहा और आज एक बार फिर 37 करोड़ के टेंडर जारी किए गए हैं।

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