मदिरा प्रेमियों के लिए खुशखबरी, शराब दुकानों में जल्द शुरू होगा ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा…

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जांजगीर। :प्रदेश के बड़े शहरों की तर्ज पर जांजगीर-चांपा जिले के शराब दुकानों में कैशलैस सुविधा के लिए पहल की जा रही है। इससे लूट, चोरी, डकैती से बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि जब शराब दुकान में कैश ही नहीं रहेगा तो लूट चोरी डकैती की गुंजाइश ही नहीं रहेगी।

गौरतलब है कि, प्रदेश के कई शराब दुकानों में फोन पे, गूगल पे की सुविधा है। खासकर प्रिमियम शॉप में कैशलैस सुविधा है। क्योंकि ग्राहक बिना पैसे लिए मोबाइल के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इसके लिए जिले में भी कोशिश की जा रही है। क्योंकि जिले के शराब दुकानों में आए दिन लूटपाट, चोरी, डकैती जैसे कई बड़ी घटनाएं हो चुकी है।

बीते दो माह के भीतर ही दो बड़ी बड़ी घटनाएं हो चुकी है। जिसमें खोखरा शराब दुकान में 78 लाख की लूट हो चुकी है। वहीं केरा शराब दुकान से पौने दो लाख रुपए की डकैती हो चुकी है। इन्हीं सभी कारणों को देखते हुए प्रशासन अब शराब दुकानों में कैशलैस सुविधा करते जा रही है। जिले में भी इस सुविधा की बड़ी दरकार है। क्योंकि अब ऑनलाइन ट्रांजक्शन का चलन बढ़ते जा रहा है। इससे ग्राहकों को सहूलियत होगी।

जिले में 48 शराब दुकानें है। जिसमें आधे में सिंगल तो आधे में कंपोजिट सुविधा है। यानी देसी व अंग्रेजी दोनों तरह की शराब बिक्री की जाती है। इसके अलावा जांजगीर व चांपा में प्रिमियम वाइन शॉप संचालित है। इन प्रत्येक शराब दुकानों में हर रोज तकरीबन 2 लाख रुपए की शराब की बिक्री होती है। यानी तकरीबन हर रोज एक करोड़ रुपए की शराब बिक्री होती है। इतने रुपयों का मिलान करना होगा। इतना ही पूरे पाई-पाई का हिसाब कैश व ऑनलाइन ट्रांजक्शन के माध्यम से भुगतान होगी उसकी जानकारी देनी होगी।

बड़े शहरों के शराब दुकानों में कैशलैस शराब बिक्री की सुविधा दी गई है। ऐसी सुविधा छोटे शहरों में भी शुरू की जा सके, इसके लिए उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लिया जाएगा। ताकि आए दिन शराब दुकानों में लूट, चोरी, डकैती जैसे वारदात होती है, इससे बचा जा सके।

  • अलेखराम सिदार, सहायक आयुक्त आबकारी

पैसों का मिलान कर पाना कठिन

दरअसल, शराब दुकानों में हर रोज लाखों रुपए की बिक्री होती है। लाखों रुपए का भुगतान का मिलान कर पाना कर्मचारियों के लिए दिक्कत हो जाएगी। कितने का नकद भुगतान हुआ है तो कितने का ऑनलाइन भुगतान हुआ है। इसकी मिलाश करना कठिन हो जाएगा। इसके लिए भी कोई तोड़ निकालने की कवायद जारी है। इसके लिए बड़े शहरों में किस तरह पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है इसके लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी। ताकि इस पहल को शराब दुकानों में चलन में लाई जा सके।

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