अंबेडकर अस्पताल में पत्रकारों से मारपीट, आड़े-तिरछे कटे बाल के साथ बाउंसरों का निकाला जुलूस…

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रायपुर। प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल प्राइवेट बाउंसरों की गुंडागर्दी का अड्डा बन गया लगता है। गरीब मरीजों के परिजनों को धमकाने-डराने के साथ अब पत्रकारों से भी मारपीट करने लगे हैं। रात में चाकूबाजी के एक मामले के कवरेज के लिए गए पत्रकारों के साथ बाउंसरों ने मारपीट की। पिस्टल दिखाते हुए जान से मारने की धमकी दी। मामले की शिकायत पर पुलिस ने रात में ही चार बाउंसरों को गिरतार कर लिया। चारों को जुलूस के रूप में पैदल कोर्ट ले जाया गया। इस दौरान आरोपियों के बाल आड़े-तिरछे कटे थे। सभी को जेल भेज दिया गया। बताया जाता है कि अस्पताल में निजी बाउंसरों की गुंडागर्दी से कई लोग परेशान थे।

यह है मामला

उरला इलाके में रात में चाकूबाजी की घटना में घायल को अंबेडकर अस्पताल लाया गया। इसकी सूचना पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार कवरेज के लिए अस्पताल पहुंचे। वहां प्राइवेट बाउंसर जतिन ने उन्हें अंदर जाने से मना किया। इसका विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए धक्कामुक्की की। इसकी सूचना मिलते ही दूसरे पत्रकार भी पहुंच गए। इसके बाद बाउंसरों ने अपने साथियों को बुला लिया और पत्रकारों पर हमले कर दिए। इसमें कई पत्रकारों को चोटें आईं। इस दौरान बाउंसर वसीम अकरम उर्फ वसीम बाबू ने एक पत्रकार पर पिस्टल तानते हुए जान से मारने की धमकी दी।

इसकी शिकायत पर आरोपी बाउंसर वसीम बाबू, जतिन गंजीर, सूरज राजपूत, मोहन राव गौरी के खिलाफ मौदहापारा पुलिस ने धारा 296, 115(2), 351(2), 126(2), 3(5) बीएनएस और 25, 27 आर्स एक्ट का अपराध दर्ज किया। वसीम से पिस्टल और 22 जिंदा कारतूस जब्त किए गए। सोमवार को पुलिस ने चारों आरोपियों को पैदल घुमाते हुए जेल भेज दिया।

कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर प्रदर्शन खत्म

मीडियाकर्मियों पर हमले का विरोध करते हुए बड़ी संया में पत्रकार अंबेडकर अस्पताल पहुंचे। आरोपियों के खिलाफ सत कार्रवाई की मांग करते हुए देर रात मेनगेट पर धरना-प्रदर्शन किया। आरोपियों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर पत्रकारों और प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने सीएम हाउस के गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर एसएसपी, एएसपी, एडीएम सहित बड़ी संया में अधिकारी मौके पर पहुंचे। शासन की ओर से स्वास्थ्यमंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद रात करीब 4 बजे धरना-प्रदर्शन खत्म हुआ।

कमीशन का खेल

अंबेडकर अस्पताल में निजी बाउंसरों रखने को लेकर प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि अंबेडकर ही नहीं अन्य सरकारी संस्थानों में वसीम के कई ठेके चलते हैं। इसके एवज में नेताओं-अफसरों तक कमीशन जाता है। कुछ माह पहले वसीम का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह नेताओं और अफसरों को कमीशन देने का जिक्र कर रहा है।

अफसरों-नेताओं को कमीशन देने के कारण ही अस्पताल में बाउंसरों की गुंडागर्दी चलती है। कई मरीज के परिजनों को भी डराते-धमकाते हैं। सूत्रों के मुताबिक जेल के रसूखदार कैदियों को बीमारी के बहाने अस्पताल में विशेष सुविधा दिलाने, उनकी सुरक्षा के लिए भी यही काम करते हैं।

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